5 मार्च 2019 - 15:28
पाकिस्तान के दोस्त अमेरिका की भारत के ख़िलाफ़ “आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक”, भारत से किस चीज़ का बदला ले रहे हैं ट्रम्प?

डोनल्ड ट्रम्प के “जीएसपी” (GSP) वापस ले लेने के एलान ने भारत के उद्योग जगत में भूचाल ला दिया है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगने जा रहा है क्योंकि मामला स्वदेशी उत्पादों पर टैक्स से जुड़ा है।

अमेरिका यूं तो 14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले और फिर पाकिस्तान में मौजूद आतंकी अड्डों पर भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के मामले में नई दिल्ली सरकार के सुर में सुर मिला रहा था, मगर अब उसने आर्थिक मोर्चे पर भारत को बड़ा झटका देने के लिए कमर कस ली है। इसके संकेत स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने दिए हैं। उन्होंने व्यापार में भारत को जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) से बाहर करने से जुड़ा बयान देकर भारत सहित वैश्विक आर्थिक गलियारे में नई हलचल पैदा कर दी है।

ट्रम्प ने इस बारे में अमेरिकी कांग्रेस को आधिकारिक तौर पर पत्र लिखकर सूचित कर दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर ट्रम्प ने अपनी घोषणा के अनुसार भारत को जीएसपी से बाहर का रास्ता दिखा दिया तो फिर अमेरिकी बाज़ार में 5.6 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों के लिए ड्यूटी फ्री यानी शुल्क मुक्त एंट्री का दरवाज़ा पूरी तरह बंद हो जाएगा और यह भारत के लिए अबतक का सबसे बड़ा आर्थिक झटका होगा। ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह भारत के लिए शुल्क मुक्त ट्रीटमेंट को समाप्त करने का इरादा रखते हैं। बताया जा रहा है कि जीएसपी के तहत अगर भागीदारी समाप्त होती है तो 2017 में डोनल्ड ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से यह भारत के ख़िलाफ़ अमेरिका की सबसे बड़ी कार्यवाही होगी।

अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने की क़सम खाने वाले डोनल्ड ट्रम्प का मानना है कि भारत व्यापार के मामले में न केवल अमेरिका से अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहा और बल्कि अमेरिकी उत्पादों पर मोटा टैक्स भी वसूल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है, जो अमेरिकी उत्पादों पर अधिक टैरिफ़ थोपता है इसलिए भारत के जवाब में उन्होंने भी भारतीय उत्पादों के अमेरिकी बाज़ार में ड्यूटी फ्री प्रवेश रोकने की सोची है। ट्रम्प ने कहा, “मैं यह क़दम इसलिए उठा रहा हूं क्योंकि अमेरिका से गहन जुड़ाव के बाद भी भारत ने अमेरिका को यह आश्वासन नहीं दिया है कि वह अपने बाज़ार में समान और उचित पहुंच प्रदान करेगा।”

दूसरी ओर भारत-अमेरिका मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रम्प ने भारत विरोधी जो घोषणा की है उसमें कई तरह की संभावनाएं पाई जाती हैं। वे कहते हैं कि एक ओर ट्रम्प वास्तव में अमेरिकी उत्पादों पर भारत द्वारा अधिक कर लगाए जाने से नाराज़ हैं तो दूसरी ओर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत द्वारा की गई वायु सेना की कार्यवाही पर दिखावटी तौर पर जहां वह भारत सरकार के साथ खड़े होने का नाटक कर रहे थे वहीं भीतर ही भीतर भारत की इस कार्यवाही से वह नाराज़ हैं।

टीकाकारों का मानना है कि इस समय अमेरिका अपने आपको अफ़ग़ानिस्तान के दलदल से निकालने की कोशिश कर रहा है और उसके इस प्रयास में पाकिस्तान उसकी सहायता कर रहा, इसलिए वह नहीं चाहता है कि भारत कोई ऐसा काम करे जिससे तालेबान के साथ जारी उसकी वार्ता पर ब्रेक लग जाए। इसी तरह मध्यपूर्व में अमेरिकी नीतियों पर भी भारत, वॉशिंग्टन का समर्थन नहीं करता है जिसको लेकर ट्रम्प प्रशासन आए दिन दिल्ली सरकार पर यह दबाव बनाता रहता है कि वह मध्यपूर्व में अमेरिकी नीतियों का खुलकर समर्थन करे नहीं तो ट्रम्प का ग़ुस्सा झेलने के लिए तैयार रहे। (रविश ज़ैदी)